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*जो सबकी घड़ी में बज रहा है,वह सबके हिस्से का समय नहीं है : विनोद कुमार शुक्ल, 2 मार्च को PEN-नाबोकोव पुरस्कार किया जाएगा सम्मानित*

रायपुर। प्रदेश के प्रसिद्ध कथाकार, उपन्यासकार, कवि और निबंधकार विनोद कुमार शुक्ल को पेन/नाबोकोव पुरस्कार (PEN/Nabokov Award) से सम्मानित किय...



रायपुर। प्रदेश के प्रसिद्ध कथाकार, उपन्यासकार, कवि और निबंधकार विनोद कुमार शुक्ल को पेन/नाबोकोव पुरस्कार (PEN/Nabokov Award) से सम्मानित किया जाएगा। इसकी घोषणा PEN America की ओर से की गई है। विनोद कुमार शुक्ल को हिंदी भाषा के महान समकालीन लेखकों में से एक माना जाता है।



विनोद कुमार शुक्ल को अंतरराष्ट्रीय साहित्य में उपलब्धि के लिए PEN/नाबोकोव पुरस्कार (PEN/Nabokov Award for Achievement in International Literature) से सम्मानित किया जाएगा।



अंतर्राष्ट्रीय साहित्य में उपलब्धि के लिए PEN/नाबोकोव पुरस्कार हर साल एक ऐसे लेखक को दिया जाता है, जिनके काम में स्थायी तौर पर मौलिकता हो और वह उत्कृष्ट हो। इसके तहत पुरस्कार राशि के तौर पर 50 हजार डॉलर (करीब 41 लाख रुपये) दिए जाते हैं।


छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में जन्मे विनोद कुमार शुक्ल की 'दीवार में एक खिड़की रहती थी', 'नौकरी की कमीज', 'खिलेगा तो देखेंगे', 'लगभग जयहिंद', 'सब कुछ होना बचा रहेगा', 'अतिरिक्त नहीं' और 'पेड़ पर कमरा' आदि प्रमुख कृतियां हैं। उनके उपन्यास 'दीवार में एक खिड़की रहती थी' को साल 1999 के साहित्य अकादमी पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था।



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