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*जेंडर इक्विटी और इक्वलिटी के अंतर को समझना होगा : डॉ. अरूणा पल्टा, कृति ग्रुप ऑफ़ इंस्टीटूशन्स में अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर महिला सम्मान कार्यक्रम का किया गया आयोजन*

रायपुर। कृति ग्रुप ऑफ़ इंस्टीटूशन्स में अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर शुक्रवार को महिला सम्मान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्र...



रायपुर। कृति ग्रुप ऑफ़ इंस्टीटूशन्स में अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर शुक्रवार को महिला सम्मान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, दुर्ग की कुलपति डॉ. अरूणा पल्टा मौजूद रही। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि आज महिलाएं भी पुरुषों के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रही है। आज के युग में नारी जिस क्षमता से घर मैनेज करती है, ठीक उसी तरह से महिलाएं अब हर क्षेत्र में अपने कार्य को बेहतर तरह से मैनेज कर रही है। चाहे वह नौकरी पेशा की भूमिका में हो, उद्यमी हो, राजनीति हो या फिर विज्ञान अनुसंधान का ही क्षेत्र क्यों न हो महिलाओं की भागीदारी आज सराहनीय है। साथ ही समाज को जेंडर इक्विटी और इक्वलिटी के अंतर को समझना होगा। अगर महिलाओं को इक्वलिटी में लाना है तो उसे पहले जेंडर इक्विटी देना होगा। 


इस अवसर पर कृति ग्रुप ऑफ इंस्टीटूशन्स के डायरेक्टर अभिषेक अग्रवाल ने कहा कि यह कहावत बिल्कुल सही है कि एक पुरुष को शिक्षित करें तो केवल एक व्यक्ति ही शिक्षित होता है, पर जब एक महिला को शिक्षित होती है तो एक पूरी पीढ़ी शिक्षित होती है। महिला बिना स्कूल जाये भी इतनी सक्षम होती है कि वह अपनी आने वाले पीढ़ी को ज्ञान दे सकती है। यह क्षमता केवल महिलाओं के पास ही होती है। महिलाएं केवल शिक्षा क्षेत्र में ही नहीं बल्कि कॉरपोरेट क्षेत्र में भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रही है। 


इंस्टीटूशन्स के अकादमिक डायरेक्टर डॉ. बी सी जैन ने कहा कि महिलाओं के लिए केवल एक ही दिन उत्सव नहीं होना चाहिए बल्कि हर दिन एक उत्सव की तरह मनाना चाहिए। हमारे समाज में पुरुष वर्ग जिस तरह से अपनी भागीदारी निभाते है उसी तरह से समाज के विकास में महिला भी अपनी भागीदारी निभाती है और वह उतनी ही सम्मान की हकदार है। साथ ही कहा कि महिला और पुरुष दोनों ही एक दूसरे के पूरक हैं। 


इस अवसर पर इंस्टीटूशन्स के सीईओ सुमित श्रीवास्तव ने अपने विचार रखते हुए कहा कि कोई भी सभ्य समाज विकसित तभी होता है जब समाज के हर वर्ग को साथ लेकर चले। महिलाओं के बिना एक सभ्य समाज की कल्पना नहीं की जा सकती है और हमारे समाज का ही यह दायित्व है कि उनकी भागीदारी को भी सुनिश्चित करें। 


कार्यक्रम के अंत में के.एस.बी.एम. की प्राचार्या रूपाली चौधरी ने आभार प्रदर्शन दिया। कार्यक्रम में महिलाओं को सम्मानित भी किया गया। समारोह में इंस्टीट्यूट के सभी विभागों के विभागाध्यक्ष, प्राध्यापकगण और सभी विभाग के विद्यार्थी उपस्थित रहे।



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