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राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के लिए सबसे बड़ी मुसीबत प्राइवेट सेना बन गया

   नई दिल्ली । कल तक प्राइवेट सेना का जो समूह रूसी सेना के साथ खड़ा था, वही आज राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के लिए सबसे बड़ी मुसीबत बन गया है।...

 

 नई दिल्ली । कल तक प्राइवेट सेना का जो समूह रूसी सेना के साथ खड़ा था, वही आज राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के लिए सबसे बड़ी मुसीबत बन गया है। रूस के लिए संकट यह है कि हत्यारों के समूह वैगनर ग्रुप ने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के खिलाफ तख्तापलट का एलान किया है। वैगनर ग्रुप के प्रमुख येवगेनी प्रिगोझिन ने कहा कि वह पुतिन की सत्ता को उखाड़ फेंकेगे। बता दें कि व्लादिमीर पुतिन ने ही प्रिगोझिन को वैगनर ग्रुप की स्थापना करने में मदद की थी। उन्होंने इस समूह को रूसी सेना से हथियार और ट्रेनिंग दिलवाई थी। वहीं, दो देशों के बीच दोस्ती की मिसाल देनी हो तो भारत और रूस इसके सबसे अच्छे उदाहरण हैं। पिछले साल जब यूक्रेन युद्ध हुआ, तो आधी से अधिक दुनिया रूस के खिलाफ हो गई थी, लेकिन भारत के साथ उसके संबंधों पर असर नहीं पड़ा। भारत और रूस के बीच मजबूत व्यापारिक संबंध है। रूस में हालात बिगड़े तो पूरी दुनिया समेत भारत में भी असर होगा। रूस-यूक्रेन युद्ध (Russia Ukraine War) के दौरान अपने एक आलेख में काउंसिल आफ स्ट्रैटेजिक अफेयर्स से संबद्ध सामरिक विश्लेषक दिव्य कुमार सोती ने लिखा था कि भारत को अपनी रणनीति पर काम करना होगा। भारत रूस से कच्चे तेल का आयात करता है। मई में भारत ने रूस से प्रतिदिन 19.6 लाख बैरल तेल का आयात किया था, जो अप्रैल की तुलना में 15 फीसदी अधिक है। भारत के कुछ कच्चे तेल आयात में रूस का हिस्सा 42 प्रतिशत है। ऐसे में रूस के संकट से तेल इम्पोर्ट प्रभावित हो सकती है। भारत रूस से बड़े पैमाने पर हथियार खरीदता है। रूस की न्यूज एजेंसी इंटरफैक्स के अनुसार, दोनों देशों के बीच हथियार का आयात सालान करीब 14 से 15 अरब डॉलर है। भारत द्वारा रूस से खरीदे गए हथियारों में सबसे अहम S-400 मिसाइल सिस्टम है।

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