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मां नर्मदा के जल में पद्मासन लगाकर अशोक दायमा रोज 6 सालों से कर रहे आराधना

  खरगोन। मध्य प्रदेश की जीवनदायिनी मां नर्मदा के भक्त अशोक दायमा रोज 55 किमी दूर से मां का आशीर्वाद पाने महेश्वर पहुंचते हैं। धार जिले के ना...

 

खरगोन। मध्य प्रदेश की जीवनदायिनी मां नर्मदा के भक्त अशोक दायमा रोज 55 किमी दूर से मां का आशीर्वाद पाने महेश्वर पहुंचते हैं। धार जिले के नालछा गांव निवासी दायमा पेशे से शिक्षक हैं और बालक आश्रम मेघापूरा की मिडिल स्कूल के बच्चों को पढ़ाते हैं। वे पिछले करीब 35 वर्षों से 55 किलोमीटर की दूरी तय कर महेश्वर नर्मदा स्नान के लिए आ रहे हैं। पहले कुछ विशेष अवसरों पर ही आते थे, लेकिन पिछले 6 वर्षों से वे लगातार मां नर्मदा के तट पर आ रहे हैं। यह मां नर्मदा के प्रति उनकी आस्था है कि प्रतिदिन 110 किलोमीटर की दूरी तय कर वह यहां हर परिस्थिति को पार करते हुए आते हैं। अशोक दायमा मां नर्मदा के जल में पद्मासन लगाकर रुद्राष्टक, नर्मदा अष्टक, हनुमान चालीसा, सुंदरकांड एवं अंत में आरती करते हैं। यह पूजन करीब डेढ़ घंटे चलता है, इस प्रकार अपने जीवन से प्रतिदिन 4 घंटे वह मां नर्मदा जी को देते हैं, जिसमें 2 घंटे आने-जाने के रहते हैं। अशोक दायमा 15 अगस्त और 26 जनवरी राष्ट्रीय पर्व पर दोनों हाथों में तिरंगा लेकर करीब एक घंटा नर्मदा जी में ध्वज फहराते हैं। दायमा ने अपनी बातचीत के दौरान बताया कि मैया की कृपा से इतने वर्षों तक से आ रहा हूं और सुरक्षित आवागमन होता है कभी कोई दुर्घटना या हादसा नहीं हुआ है। चाहे कड़कती ठंड हो गर्मी हो या बारिश हो, वह महेश्वर आने का क्रम नहीं तोड़ते हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें कई ग्रंथ है कंठस्थ हैं। अशोक दायमा उम्र करीब 58 वर्ष की है, लेकिन उनकी चुस्ती फुर्ती में वृद्धावस्था नहीं झलकती है। दायमा नालछा के चौसठ योगिनी मंदिर के सामने स्थित मानसरोवर तालाब में भी त्योहारों और विशेष अवसरों पर पद्मासन लगाकर सुंदरकांड का पाठ करते हैं। जिसे सुनने बड़ी संख्या में भक्त पहुंचते हैं। अशोक दायमा इस प्रकार जल में पद्मासन लगाकर विभिन्न धार्मिक ग्रंथों का पाठ मध्य प्रदेश ही नहीं भारत के कई धार्मिक स्थलों पर भी कर चुके हैं।

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