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रायपुर पुलिस ने हरियाणा के नकली परीक्षार्थी को किया गिरफ्तार

   रायपुर। सेंट्रल बोर्ड आफ सेकंडरी एजुकेशन (सीबीएसई) की ओर से देशभर के एकलव्य माडल स्कूलों के लिए जूनियर सेकेट्रेरिएट असिस्टेंट और हास्टल व...

 

 रायपुर। सेंट्रल बोर्ड आफ सेकंडरी एजुकेशन (सीबीएसई) की ओर से देशभर के एकलव्य माडल स्कूलों के लिए जूनियर सेकेट्रेरिएट असिस्टेंट और हास्टल वार्डन के पदों के लिए आयोजित भर्ती परीक्षा में हिसार निवासी नकली परीक्षार्थी दीपक कुमार को गिरफ्तार किया गया है। आरोपित रविवार को रायपुर के महर्षि विद्या मंदिर टाटीबंध में परीक्षा देते पकड़ा गया था। 12वीं पास आरोपित हिसार निवासी ग्रेजुएट परीक्षार्थी सुनील कुमार के नाम पर पेपर दे रहा था। दोनों को आरोपित बनाया गया है। सुनील कुमार फरार है। दीपक दो लाख रुपये लेकर परीक्षा दे रहा था। पुलिस जांच कर रही है कि इस गिरोह में और कितने लोग शामिल हैं।  सीएसपी मयंक गुर्जर ने बताया कि रविवार को महर्षि विद्या मंदिर टाटीबंध में एकलव्य माडल स्कूलों के लिए जूनियर सेकेट्रेरिएट असिस्टेंट और हास्टल वार्डन के पदों के लिए भर्ती परीक्षा का आयोजन किया गया था। परीक्षा में हरियाणा के हिसार निवासी सुनील कुमार नाम के परीक्षार्थी को भी सेंटर मिला था। सुनील को दूसरी पाली की परीक्षा में शामिल होना था।परीक्षा में शामिल होने से पहले सभी परीक्षार्थियों का बायोमेट्रिक रजिस्ट्रेशन कराया गया। इसमें परीक्षा देने आए सुनील ने भी रजिस्ट्रेशन कराया। सभी परीक्षार्थियों के रजिस्ट्रेशन का डेटा परीक्षा एजेंसी के दिल्ली मुख्यालय भेजा गया। इसके बाद सभी हाल में परीक्षा देने लगे। शाम करीब 4.30 बजे दिल्ली से परीक्षा एजेंसी के कर्मचारी ने स्कूल में ड्यूटी करने वालों को बताया कि सुनील का बायोमेट्रिक मैच नहीं कर रहा है। उसका दोबारा रजिस्ट्रेशन कराएं। इसके बाद सुनील का दोबारा बायोमेट्रिक रजिस्ट्रेशन कराया गया और आवेदन फार्म के बायोमेट्रिक निशान से मिलान कराया गया, तो वह अलग निकला। इसके बाद सुनील को परीक्षा देने नहीं दिया गया। उससे पूछताछ की गई। उसने राजफाश किया कि वह सुनील नहीं दीपक कुमार है। सुनील के स्थान पर वह परीक्षा दे रहा था। पुलिस की पूछताछ में दीपक ने बताया कि प्रारंभिक परीक्षा पास करने के लिए दो लाख रुपये में सौदा हुआ था। आगे की परीक्षा के लिए और पैसा मिलते। दीपक खुद को एयर गन शूटिंग खिलाड़ी बताया है। शूटिंग की ट्रेनिंग के लिए राइफल के लिए उसे पैसे की जरूरत थी। इसलिए वो दूसरे की जगह परीक्षा में शामिल होने के लिए रायपुर आया। परीक्षा देने के लिए 16 दिसंबर को ट्रेन से रायपुर पहुंचा था।

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