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ख्वाब वेलफेयर फाउंडेशन जरूरतमंदों की सेवा में आगे

   बिलासपुर । ख्वाब वेलफेयर फाउंडेशन से जुड़कर छह साल से कर रहीं कई महत्वपूर्ण कार्य ख्वाब वेलफेयर फाउंडेशन अब किसी की पहचान का मोहताज नहीं ...

 

 बिलासपुर । ख्वाब वेलफेयर फाउंडेशन से जुड़कर छह साल से कर रहीं कई महत्वपूर्ण कार्य ख्वाब वेलफेयर फाउंडेशन अब किसी की पहचान का मोहताज नहीं है। इस फाउंडेशन के सदस्य ऐसे कई कार्यों को पूरा कर रहे हैं, जो किसी चुनौती से कम नहीं है। पिकनिक स्पाट, प्रसिद्व वाटर फाल जैसे प्राकृतिक केंद्रों को साफ रखने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। वहीं सरकारी स्कूलों में जाकर वहां के बच्चों को मोटिवेट भी कर रहे हैं।  खासकर 11वीं व 12वीं के छात्रों को उन रास्तों से अवगत कराते हैं, जिसके जरिए वह अपना बेहतर भविष्य बना सकते हैं। यह बात बहुत कम लोगों को मालूम होगा कि फाउंडेशन के इन कार्यों के पीछे बेटियों का भी महत्वपूर्ण हाथ है। इस फाउंडेशन के संस्थापक ब्रैंडन डिसूजा हैं। वर्ष 2018 में गुरु घासीदास विश्वविद्यालय में पढ़ाई करते-करते उनके मन में इस फाउंडेशन के गठन का विचार आया। हालांकि वह यह जानते थे कि बिना समूह के कोई भी कार्य करना आसान नहीं होता। उन्होंने दोस्तों से बात की।   दोस्तों ने न केवल उनकी इस सोच की प्रशंसा की बल्कि जुड़कर साथ काम करने का समर्थन भी दिया। पहले पांच सदस्य और उसके बाद संख्या बढ़कर 10 हुई। नि:श्वार्थ काम करने वाले इस फाउंडेशन से छात्र के अलावा छात्राएं भी प्रभावित हुईं और वह भी जुड़ गईं। स्वच्छता से जुड़े कार्य हो या फिर शिक्षा। शहर की बेटियों ने पूरा सहयोग दिया। जानकार खुशी होगी कि अब इस फाउंडेशन के कई प्रमुख पदों पर छात्राएं हैं। वर्तमान में ख्वाब वेलफेयर फाउंडेशन की सह संस्थापक भवानी पटेल, सह सचिव पूर्णिमा पाटनवार, संरक्षक श्रद्धा जैन हैं। मीडिया प्रभारी की जिम्मेदारी भी वर्तिका सिंह को सौंपी गई है। इनके अलावा अक्षिता मंथा, खुशबू केंवट, मृदु आनंद, इशिता चक्रवर्ती, श्रुति नयन, अंजलि बर्नवाल, आकृति अग्रवाल, मनीषा त्रिपाठी, निशु यादव, मंदीप कौर, स्मृति गुप्ता, पूनम पांडा, साक्षी यादव, आकांक्षा मंथा, प्रियंका सोनी आदि सदस्य भी फाउंडेशन की हर गतिविधियों को सफलता दिलाने में अपना अहम भूमिका निभाती हैं। 132 सदस्यों वाले इस फाउंडेशन में महिलाओं सदस्यों की संख्या 40 के लगभग है। 25 से ज्यादा रक्तदान शिविर का आयोजन फाउंडेशन कर चुका है। इसके अलावा 10 सरकारी स्कूलों में जाकर छात्रों को शिक्षा के प्रति प्रेरित करती हैं। इतना ही नहीं कापी-किताबें भी उपलब्ध कराती हैं। दो हजार से अधिक वालंटियर के साथ कई अलग-अलग जगहों पर सफाई अभियान चलाया। इतना ही नहीं कोरोना संक्रमणकाल में इनके द्वारा की गई मदद कि जितनी प्रशंसा की जाए वह कम है। जरूरतमंदों को भोजन, नाश्ता से लेकर दैनिक उपयोग की वस्तुएं उपलब्ध कराने का कार्य किया। इसके अलावा क्रिसमस, दीपावली जैसे प्रमुख त्योहारों में गरीब बच्चों के बीच जाकर खुशियां बांटती है। बाक्स- मदद करने हर माह 100 रुपये करते हैं जमा इस फाउंडेशन को किसी तरह की सरकारी आर्थिक मदद नहीं मिलती और यह किसी मांगने का प्रयास करते हैं। आर्थिक परेशानियां न हो इसलिए सभी महिला व पुरुष सदस्य हर महीने 100 रुपये जमा करते हैं। इसके बाद जमा राशि से ही मदद करने का प्रयास करते हैं।

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