Page Nav

HIDE

Grid

GRID_STYLE

Pages

ब्रेकिंग

latest

बिलासपुर में आप और बसपा को नहीं मिला जनता का समर्थन

 बिलासपुर । बिलासपुर जिले में तीसरा मोर्चा के रूप में लड़ने वाले अलग-अलग दलों का असर इस चुनाव में पूरी तरह ध्वस्त हो गया। आम आदमी पार्टी से ...

 बिलासपुर । बिलासपुर जिले में तीसरा मोर्चा के रूप में लड़ने वाले अलग-अलग दलों का असर इस चुनाव में पूरी तरह ध्वस्त हो गया। आम आदमी पार्टी से दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल व पंजाब के सीएम भगवंत मान की गारंटी और उत्तरप्रदेश की पूर्व सीएम बहन मायावती की अपील सहित जनता कांग्रेस जोगी की छत्तीसगढ़िया ताकत का कोई फायदा देखने को नहीं मिला। जिले के छह विधानसभा सीटों में किसी भी सीट पर तीसरा मोर्चा का कोई प्रभाव नजर नहीं आया। कांग्रेस और भाजपा के प्रत्याशियों ने मतदाताओं को मतगणना के अंत तक अपनी ओर बांधकर रखा। विधानसभा बिलासपुर, मस्तूरी, बेलतरा, तखतपुर, बिल्हा, कोटा में आम आदमी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस जोगी (जे) के प्रत्याशी चुनाव मैदान पर ऊतरे थे। तीनों दलों के नेता आचार संहिता लगने के बाद से मतगणना तक जीत का पूरा जोर दावा करते रहे। इससे पहले तीसरा मोर्चा के कारण साल 2018 विधानसभा चुनाव में त्रिकोणीय मुकाबले की स्थिति बन गई थी। तब छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस और बसपा के प्रत्याशी सामान्य तरीके से चुनाव लड़े। इसका फायदा बीजेपी को मिला था और जिले के मस्तूरी डा. कृष्णमूर्ति बांधी, बेलतरा में रजनीश सिंह, बिल्हा में धरमलाल कौशिक और कोटा में जनता कांग्रेस से डा. रेणु जोगी जीत दर्ज किए थे। बिलासपुर जिले में इस बार तीसरा मोर्चा के किसी भी पार्टियों का कोई प्रभाव देखने को नहीं मिला। उल्टे सभी दलों के प्रत्याशियों को साल 2018 की तुलना में बहुत कम वोट मिली है। छह विधानसभाओं के जनता ने तीसरा मोर्चा को पूरी तरह से नकार दिया। कांग्रेस व बीजेपी के प्रत्याशियों ने अपने दम पर चुनावी मैदान फतह किया। जिले में तीसरा मोर्चा के प्रत्याशियों के समर्थन में दो बड़ी राष्ट्रीय पार्टी उत्तर प्रदेश के बहुजन समाज पूर्व सीएम मायावती, आम आदमी पार्टी के पंजाब के सीएम भगवंत मान, दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने साइंस कालेज मैदान में दो बड़ी सभा किए थे। आप पार्टी के नेताओं ने जोरशोर से जनता के सामने अपनी गारंटी रखें। वहीं मायावती ने दलित मतदाताओं को साधने की कोशिश की थी। इन दोनों सभाओं में जमकर लोगों की भीड़ दिखी। इसे लेकर चुनाव में फायदा मिलने का दावा भी किया जा रहा था, लेकिन सारी अटकलें आज चुनाव परिणाम के बाद धराशाई हो गईं। यहीं वजह है कि तीनों राष्ट्रीय नेताओं ने भीड़ को वोट के रूप बदलने में नाकाम हो गए। आम आदमी पार्टी, बसपा, जनता कांग्रेस के प्रत्याशी इस बार पूरे दमखम के साथ चुनाव लड़ रहे थे। दोनों दलों के नेताओं द्वारा जमकर प्रचार प्रसार भी किया गया। लेकिन विधानसभा क्षेत्रों में आप, बसपा और जनता कांग्रेस के स्टार प्रचारक चुनाव के बीच में विधानसभा क्षेत्रों में प्रचार करने नहीं पहुंचे थे। किसी भी जगह कैंपेनिंग नहीं दिखी और न ही उम्मीदवार संघर्ष करते नजर आए। चुनाव बैलेट पेपर व इवीएम मशीन तक ही सीमित होकर रह गया। प्रदेश गठन के बाद से जितने भी विधानसभा चुनाव हुए है उसमें यह देखने को मिला है कि मस्तूरी विधानसभा सीट में जब-जब बसपा प्रभावी होती है। त्रिकोणीय मुकाबला होने की संभावना होती थी। ऐसे में इसका बीजेपी को पुरा फायदा मिलता था। जब बसपा बीस हजार वोट का आंकड़ा पार करती है तब बीजेपी को फायदा होता था। इस बार बसपा को 15,583 वोट मिली। इसका भारी नुकसान बीजेपी प्रत्याशी डा. कृष्णामूर्ति बांधी को उठाना पड़ा और कांग्रेस प्रत्याशी लहरिया को फायदा मिला।

No comments