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राहर दाल इन दिनों 180 रुपये किलो पहुंची

  रायपुर। नए वित्तीय वर्ष 2024-25 का पहला महीना पूरा होने वाला है और खाद्य सामग्रियों पर महंगाई की मार पड़ने वाली है। इन दिनों बाजार में चाय...

 

रायपुर। नए वित्तीय वर्ष 2024-25 का पहला महीना पूरा होने वाला है और खाद्य सामग्रियों पर महंगाई की मार पड़ने वाली है। इन दिनों बाजार में चाय की चुस्की से लेकर आटा-दाल सबकी कीमतों में तेजी आ गई है। चिल्हर अनाज बाजार में पखवाड़े भर पहले 165 रुपये किलो तक बिक रही राहर दाल इन दिनों 180 रुपये किलो पहुंच गई है। थोक में ही राहर दाल इन दिनों 13500 रुपये प्रति क्विंटल से लेकर 17000 रुपये प्रति क्विंटल बिक रही है। राहर दाल के साथ ही चना दाल भी इन दिनों 80 रुपये किलो पार हो गई है। कारोबारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में दालों की कीमतों में और तेजी की संभावना है। नई फसल से आवक शुरू होने के बाद भी पैदावार कम होने के चलते दाल की आवक कमजोर बनी हुई है। खाद्य सामग्री की कीमतों में आई तेजी का असर उपभोक्ताओं के महीने के बजट में पड़ा है और पिछले वर्ष अप्रैल की तुलना में इस वर्ष अप्रैल में महीने के बजट में करीब 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी आ गई है। अनाज बाजार में इन दिनों 235 रुपये (प्रति पांच किलो) में बिकने वाला ब्रांडेड आटा 245 रुपये (प्रति पांच किलो) हो गया है। कारोबारी मनीष राठौड़ ने बताया कि दालों में तो आवक कमजोर होने के कारण कीमतों में तेजी आई है। वहीं इन दिनों आटे की मांग में जबरदस्त तेजी आई है,इसका असर कीमतों में देखने को मिला है। चाय व चीनी दोनों की कीमतों में तेजी आ गई है। पिछले वर्ष अप्रैल 2023 में 450 रुपये किलो बिकने वाली चाय इन दिनों 500 रुपये किलो से ज्यादा हो गई है। वहीं पिछले वर्ष अप्रैल में 39 से 40 रुपये किलो बिकने वाली चीनी इन दिनों 41 से 43 रुपये किलो बिक रही है। पैकेज्ड दूध भी इन दिनों 56 रुपये लीटर बिक रहे है,पिछले वर्ष यह दूध 54 रुपये लीटर था। पिछले वर्ष अप्रैल की तुलना में इस वर्ष अप्रैल में चावल की कीमतों में जबरदस्त तेजी आ गई है। अप्रैल 2023 में 45 से 49 रुपये किलो में बिकने वाला चावल इन दिनों 47 से 61 रुपये किलो बिक रहा है। हालांकि चावल की कीमतों में तेजी दिसंबर 2023 से ही आनी शुरू हो गई थी। बीते पखवाड़े भर में ही थोड़े सुस्त चल रहे अनाज किराना मार्केट की रफ्तार जबरदस्त बढ़ गई। इस पखवाड़े में त्योहारों के चलते शहर में लगभग 800 से ज्यादा क्षेत्रों में भंडारा का आयोजन हुआ,इसके चलते बीते आटा व चावल की जबरदस्त बिक्री हुई। बताया जा रहा है कि बीते तीन महीने में होने वाली आटा-चावल की बिक्री इन 15 दिनों में ही हो गई।

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