₹60 हजार के CIF ऋण से बदली ग्रामीण महिला की आर्थिक स्थिति एमसीबी/ ग्राम पंचायत नागपुर की निवासी कश्मीरा जायसवाल आज ग्रामीण महिला उद्यमित...
₹60 हजार के CIF ऋण से बदली ग्रामीण महिला की आर्थिक स्थिति
एमसीबी/ ग्राम पंचायत नागपुर की निवासी कश्मीरा जायसवाल आज ग्रामीण महिला उद्यमिता
की एक प्रेरक मिसाल बन चुकी हैं। वे “ओम शांति महिला स्व सहायता समूह” की
सक्रिय सदस्य हैं और सिलाई कार्य एवं कपड़ा दुकान के माध्यम से अपनी आजीविका
चला रही हैं। यह सकारात्मक बदलाव सरकार की बिहान योजना के सहयोग से संभव
हो पाया है, जिसने ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनने का अवसर
प्रदान किया है।
जून 2025 में कश्मीरा जायसवाल को बिहान योजना के अंतर्गत ₹60,000 का CIF ऋण मिला। इस राशि से उन्होंने नई सिलाई मशीनें खरीदीं, कपड़े, धागे और अन्य सिलाई सामग्री का भंडारण किया तथा गांव में एक छोटी सी कपड़ा दुकान भी प्रारंभ की। पहले जहां वे सीमित संसाधनों के कारण काम नहीं बढ़ा पाती थीं, वहीं इस आर्थिक सहयोग से उनका व्यवसाय व्यवस्थित और टिकाऊ बन सका। पहले घर की छोटी-छोटी जरूरतों के लिए उन्हें कभी-कभी दूसरों से कर्ज लेना पड़ता था, लेकिन आज वे अपनी मेहनत और आय से परिवार का खर्च आसानी से चला रही हैं। उनके व्यवसाय से उन्हें हर माह ₹4,000 से ₹6,000 तक की नियमित आय होने लगी है, जिससे घरेलू जरूरतें और बचत सभी संभव हो पा रहे हैं। कश्मीरा की दुकान आज गांव की महिलाओं के लिए एक सुविधाजनक केंद्र बन चुकी है। गांव की महिलाएं अब कपड़े सिलवाने या खरीदने के लिए कश्मीरा की दुकान जाती है। इससे न केवल कश्मीरा का कारोबार बढ़ा है, बल्कि गांव में उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा भी बढ़ी है। कश्मीरा जायसवाल कहती हैं कि इस बदलाव के लिए वे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी एवं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जी का हृदय से धन्यवाद करती हैं। उनके अनुसार, सरकार की योजनाओं और सहायता के कारण ही आज वे अपने पैरों पर खड़ी होकर सम्मान के साथ जीवन जी पा रही हैं। कश्मीरा की यह यात्रा बताती है कि जब महिलाओं को सही अवसर, वित्तीय सहयोग और मार्गदर्शन मिलता है, तो वे न केवल अपना जीवन बदलती हैं, बल्कि पूरे गांव की तस्वीर भी बदल सकती हैं।
जून 2025 में कश्मीरा जायसवाल को बिहान योजना के अंतर्गत ₹60,000 का CIF ऋण मिला। इस राशि से उन्होंने नई सिलाई मशीनें खरीदीं, कपड़े, धागे और अन्य सिलाई सामग्री का भंडारण किया तथा गांव में एक छोटी सी कपड़ा दुकान भी प्रारंभ की। पहले जहां वे सीमित संसाधनों के कारण काम नहीं बढ़ा पाती थीं, वहीं इस आर्थिक सहयोग से उनका व्यवसाय व्यवस्थित और टिकाऊ बन सका। पहले घर की छोटी-छोटी जरूरतों के लिए उन्हें कभी-कभी दूसरों से कर्ज लेना पड़ता था, लेकिन आज वे अपनी मेहनत और आय से परिवार का खर्च आसानी से चला रही हैं। उनके व्यवसाय से उन्हें हर माह ₹4,000 से ₹6,000 तक की नियमित आय होने लगी है, जिससे घरेलू जरूरतें और बचत सभी संभव हो पा रहे हैं। कश्मीरा की दुकान आज गांव की महिलाओं के लिए एक सुविधाजनक केंद्र बन चुकी है। गांव की महिलाएं अब कपड़े सिलवाने या खरीदने के लिए कश्मीरा की दुकान जाती है। इससे न केवल कश्मीरा का कारोबार बढ़ा है, बल्कि गांव में उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा भी बढ़ी है। कश्मीरा जायसवाल कहती हैं कि इस बदलाव के लिए वे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी एवं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जी का हृदय से धन्यवाद करती हैं। उनके अनुसार, सरकार की योजनाओं और सहायता के कारण ही आज वे अपने पैरों पर खड़ी होकर सम्मान के साथ जीवन जी पा रही हैं। कश्मीरा की यह यात्रा बताती है कि जब महिलाओं को सही अवसर, वित्तीय सहयोग और मार्गदर्शन मिलता है, तो वे न केवल अपना जीवन बदलती हैं, बल्कि पूरे गांव की तस्वीर भी बदल सकती हैं।

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