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महतारी वंदन योजना से बदली जिंदगी- सुखी पुनेम बनीं गांव की महिलाओं के लिए प्रेरणा

   रायपुर ।  महिलाओं के साथ असमानता को दूर करने, स्वास्थ्य एवं पोषण स्तर में सतत् सुधार लाने, आर्थिक स्वावलंबन तथा सशक्तिकरण को बढ़ावा देने ...

 

 रायपुर ।  महिलाओं के साथ असमानता को दूर करने, स्वास्थ्य एवं पोषण स्तर में सतत् सुधार लाने, आर्थिक स्वावलंबन तथा सशक्तिकरण को बढ़ावा देने और परिवार में उनकी निर्णय लेने की भूमिका को सुदृढ़ करने के दृष्टिकोण से महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने की दिशा में राज्य शासन द्वारा महतारी वंदन योजना मार्च 2024 से लागू की गई है। महिलाओं को आर्थिक रूप अधिक स्वा वलम्बीन बनाया जा सके।

बीजापुर जिले के गंगालूर क्षेत्र के ग्राम कावड़गांव की 47 वर्षीय श्रीमती सुखी पुनेम आज अपने गांव की महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई हैं। उन्होंने अपने पति सोमलू पुनेम के साथ मिलकर मेहनत और लगन से आत्मनिर्भर बनने की मिसाल पेश की है। उन्होंनें बाड़ी हरी-भरी उगाकर और सब्जियां बेचकर उनकी आय में भी बढ़ोतरी कर आत्मनिर्भर हो गई।

छत्तीसगढ़ सरकार की महतारी वंदन योजना ने सुखी पुनेम के जीवन में बड़ा बदलाव लाया है। इस योजना से मिलने वाली आर्थिक सहायता ने उन्हें कुछ नया करने का आत्मविश्वास दिया। श्रीमती सुखी पुनेम ने इस राशि का उपयोग अपने घर के पास एक छोटी-सी बाड़ी (किचन गार्डन) बनाने में किया। उन्होंने बीज खरीदे और बाड़ी की अच्छी तरह तैयारी की। मेहनत के साथ उन्होंने टमाटर, बैंगन और सरसों की भाजी जैसी कई पौष्टिक सब्जियां उगाना शुरू किया। कुछ ही समय में उनकी बाड़ी हरी-भरी हो गई और इससे उनके परिवार को ताजी सब्जियां मिलने लगीं। साथ ही अतिरिक्त सब्जियां बेचकर उनकी आय में भी बढ़ोतरी होने लगी।
इस काम में स्थानीय आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका ने भी उनका मार्गदर्शन किया। उन्होंने बाड़ी की देखभाल और सब्जियों की बेहतर पैदावार के लिए जरूरी सलाह दी। 

श्रीमती सुखी पुनेम की सोच केवल अपने परिवार तक सीमित नहीं है। वे अपनी बाड़ी में उगाई गई ताजी सब्जियां गांव के स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चों के लिए भी उपलब्ध कराती हैं, जिससे बच्चों को पौष्टिक आहार मिल सके। आज श्रीमती सुखी पुनेम की मेहनत और लगन से तैयार हुई बाड़ी आत्मनिर्भरता और पोषण का अच्छा उदाहरण बन गई है। उनकी सफलता की कहानी यह संदेश देती है कि यदि सरकारी योजनाओं का सही उपयोग किया जाए, तो ग्रामीण महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत बन सकती हैं और समाज के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं।

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