मोर गांव,मोर पानी अभियान अंतर्गत 87 हजार से अधिक जल संचयन संरचनाएं निर्मित,राष्ट्रीय स्तर पर जिला तीसरे पायदान पर रायपुर । आने वाली पीढ़ि...
मोर गांव,मोर पानी अभियान अंतर्गत 87 हजार से अधिक जल संचयन संरचनाएं निर्मित,राष्ट्रीय स्तर पर जिला तीसरे पायदान पर
बलौदाबाजार जिले में जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए संचालित मोर गांव, मोर पानी अभियान 2.0 एक जन-आंदोलन का रूप ले चुका है। इस महत्वाकांक्षी अभियान के अंतर्गत अब तक जिले के 722 गांव,517 ग्राम पंचायत, 9 नगरीय क्षेत्र में 87137 जल संचयन संरचनाओं का निर्माण किया गया है। इनमें सोख्ता गड्ढे, चेक डैम, तालाबों का गहरीकरण और रूफ-टॉप हार्वेस्टिंग जैसे कार्य शामिल हैं। इन संरचनाओं के माध्यम से बारिश के पानी को बहकर व्यर्थ जाने से रोककर सीधे जमीन के भीतर उतारा जा रहा है।
प्रमुख जल संचयन संरचना निर्माण कार्य
कैच द रैन-जल शक्ति अभियान 2.0 जल शक्ति अभियान के तहत जिले में जल
संरक्षण एवं जल संवर्धन के कुल 87173 कार्यों का जेएसए-सीटीआर पोर्टल में
प्रविष्टि किया गया है। रैन वाटर हार्वेस्टिंग, सोक पीट 61831 कार्य,डबरी,
कुंआ, तालाब, रिचार्ज पिट, डब्ल्यूएटी,एससीटी 7803 कार्य,जल संसाधन विभाग
द्वारा एनीकट, स्टॉप डेम, डायवर्सन, जलाशय, नहर 21 कार्य,वन विभाग(कैम्पा)
द्वारा एलबीसीडी, एससीटी, गाबिन, चेक डेम 15259 कार्य,कृषि विभाग द्वारा
बोरवेल रिचार्ज,सोक पिट,ट्रेंच 1153 कार्य,अर्बन फंड द्वारा रैन वाटर
हार्वेस्टिंग 1034 कार्य,सीएसआर मद द्वारा तालाब गहरीकरण, आरडब्ल्यूएच,
ट्रेंच, चेक डेम 72 कार्य, अमृत सरोवर एवं नवीन तलब 51 शामिल है।
राष्ट्रीय स्तर पर उपलब्धि
जल प्रबंधन के क्षेत्र में किए गए विभिन्न संरचना निर्माण में राष्ट्रीय
स्टर पर जिला वर्तमान में जिला तीसरे स्थान पर है। यह उपलब्धि न केवल
प्रशासन की कार्यकुशलता को दर्शाती है, बल्कि क्षेत्र के किसानों आम नागरिक
एवं गांव में गठित जल संचय वाहनी क़ी सक्रिय सहयोग का भी परिणाम है। इसके
साथ ही जल संचय को जन आंदोलन का स्वरुप देकर लोगों को जागरूक भी किया जा
रहा है।
भू-जल स्तर में सुधार और कृषि को लाभ
व्यापक स्तर पर बनी इन संरचनाओं के कारण क्षेत्र के भू-जल स्तर में
उल्लेखनीय सुधार होग़ा। इसका सीधा लाभ रबी और खरीफ दोनों फसलों के दौरान
किसानों को मिलेगा। सिंचाई के लिए जल की उपलब्धता बढ़ने से कृषि उत्पादकता
में वृद्धि की उम्मीद है।
प्रशासन का संकल्प
जिला प्रशासन द्वारा जल संरक्षण की यह प्रक्रिया सतत रूप से जारी रहेगी।
आगामी मानसून से पहले 1 लाख से अधिक संरचनाओं को पूर्ण करने का लक्ष्य रखा
गया है ताकि जिले के प्रत्येक गांव को जल के मामले में आत्मनिर्भर बनाया जा
सके।

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