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"रजिस्ट्री में ही नामांतरण की नई सुविधा शुरू"

  रायपुर । छत्तीसगढ़ गठन के बाद पहली बार जमीन के लगभग सभी रिकॉर्ड ऑनलाइन कर दिए गए हैं। 5 मई तक रायपुर समेत राज्य के सभी जिलों के गांवों में...

 

रायपुर । छत्तीसगढ़ गठन के बाद पहली बार जमीन के लगभग सभी रिकॉर्ड ऑनलाइन कर दिए गए हैं। 5 मई तक रायपुर समेत राज्य के सभी जिलों के गांवों में 5.87 करोड़ से ज्यादा खसरा रिकॉर्ड डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध करा दिए गए हैं। साथ ही सरकार ने जमीन की रजिस्ट्री और नामांतरण प्रक्रिया को भी ऑनलाइन सिस्टम से जोड़ दिया है।

अब रजिस्ट्री होते ही नामांतरण प्रक्रिया स्वतः शुरू हो जाएगी। लोगों को तहसीलों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। रजिस्ट्री में दिए गए मोबाइल नंबर को जमीन रिकॉर्ड से लिंक किया गया है। ऐसे में रिकॉर्ड में किसी तरह की गड़बड़ी, फेरबदल या संदिग्ध गतिविधि होने पर जमीन मालिक को तत्काल जानकारी मिल सकेगी और समय रहते कार्रवाई भी संभव होगी।

राजस्व विभाग ने 20 हजार से ज्यादा गांवों की जमीन का डेटा ऑनलाइन कर राजस्व व्यवस्था को पेपरलेस और पारदर्शी बनाने का दावा किया है। सिस्टम में सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब खसरा या बी-1 रिकॉर्ड में बिना अनुमति कोई भी छेड़छाड़ या संशोधन की कोशिश होने पर जमीन मालिक और संबंधित अधिकारियों के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर रियल टाइम एसएमएस अलर्ट जाएगा।

राजस्व विभाग के आंकड़ों के मुताबिक राज्य के 20,286 गांवों के खसरा रिकॉर्ड और 19,694 गांवों के नक्शे स्कैन कर ऑनलाइन किए जा चुके हैं। प्रधानमंत्री गति शक्ति योजना के तहत 18,959 गांवों के नक्शों की जियोरेफरेंसिंग भी पूरी कर ली गई है।

इस तकनीक से जमीन का सटीक लोकेशन, सीमांकन और रिकॉर्ड डिजिटल प्लेटफॉर्म पर देखा जा सकता है। इसके अलावा राज्य के सभी 105 उप-पंजीयक कार्यालयों को तहसील कार्यालयों से ऑनलाइन जोड़ा गया है, जिससे जमीन संबंधी मामलों के निपटारे की प्रक्रिया तेज हुई है।


लोगों को अब ये सुविधाएं

रजिस्ट्री होते ही नामांतरण प्रक्रिया स्वतः शुरू हो रही है।
बैंक में गिरवी रखी जमीन की जानकारी भी पोर्टल पर उपलब्ध है।
खरीदी-बिक्री में पारदर्शिता बढ़ी, लोग देख सकते हैं कि जमीन पर लोन है या नहीं।
गूगल प्ले स्टोर के मोबाइल एप से स्मार्टफोन पर ही रिकॉर्ड देखे जा सकते हैं।
खसरा या अन्य जानकारी के लिए पटवारी कार्यालय जाने की जरूरत खत्म हुई।
खसरा नंबर के आधार पर रिकॉर्ड ऑनलाइन डाउनलोड और प्रिंट किए जा सकते हैं।
एक ही जमीन की फर्जी तरीके से बार-बार रजिस्ट्री रोकने में मदद मिलेगी।
राज्य की 252 तहसीलों में से 172 में मॉडर्न रिकॉर्ड रूम स्वीकृत हो चुके हैं, जिनमें 155 का काम पूरा हो गया है।

किसी को भी दफ्तरों में घूमने की जरूरत नहीं

डिजिटल इंडिया भू-अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम से विभाग के काम करने के सिस्टम में बड़ा बदलाव किया गया है। लोगों को खसरा-बी-1 या नामांतरण जैसे कामों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने की जरूरत नहीं है। लोग अब घर बैठे डिजिटल हस्ताक्षरयुक्त खसरा और बी-1 की प्रति निशुल्क डाउनलोड कर सकते हैं। -टंकराम वर्मा, राजस्व मंत्री छत्तीसगढ़

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