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’मनरेगा से बनी नर्सरी से बदल रही वनांचलों की तस्वीर’

    ’कवर्धा जिले के बोड़ला क्षेत्र में रोजगार, महिला सशक्तिकरण और हरियाली की नई पहल’ रायपुर । छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम लिमिटेड द्वारा ...

 

 

’कवर्धा जिले के बोड़ला क्षेत्र में रोजगार, महिला सशक्तिकरण और हरियाली की नई पहल’

रायपुर छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम लिमिटेड द्वारा कवर्धा परियोजना मंडल के अंतर्गत बोड़ला ब्लॉक के वनांचल क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने की दिशा में सराहनीय पहल की जा रही है। मनरेगा योजना के अभिसरण से स्थापित की गई 6 नर्सरियां आज ग्रामीणों के लिए रोजगार और हरियाली का नया केंद्र बन गई हैं। इन नर्सरियों में बड़े पैमाने पर फलदार और मिश्रित प्रजातियों के पौधे तैयार किए जा रहे हैं, जिससे एक ओर क्षेत्र में हरित आवरण बढ़ेगा तो वहीं दूसरी ओर ग्रामीण परिवारों की आय में भी वृद्धि होगी।

’छह गांवों में तैयार हो रही नर्सरियां’
         बोड़ला विकासखण्ड के भीरा, कामाडबरी, लबदा, सिंघारी, छुही और भलपहरी गांवों में यह नर्सरियां विकसित की जा रही हैं। प्रत्येक नर्सरी में लगभग 30 हजार पौधों का उत्पादन किया जा रहा है। इस प्रकार कुल 1 लाख 80 हजार पौधे तैयार किए जा रहे हैं। इन नर्सरियों में स्थानीय जलवायु के अनुरूप आम, जामुन, चीकू, कटहल, काजू, बादाम, मुनगा, आंवला, बहेड़ा, हर्रा, शहतूत, खम्हार और बांस जैसी विभिन्न प्रजातियों के पौधे तैयार किए जा रहे हैं।

’ग्रामीणों को मिलेगा निःशुल्क पौध वितरण’
       योजना के तहत तीसरे वर्ष में जब पौधे पूरी तरह तैयार हो जाएंगे, तब इन्हें आसपास के ग्रामीणों को निःशुल्क वितरित किया जाएगा। ग्रामीण इन पौधों को अपने खेतों की मेड़ और बाड़ी में लगाएंगे, जिससे भविष्य में फल, वनोपज और लकड़ी के माध्यम से अतिरिक्त आय प्राप्त होगी।

’महिलाओं को मिल रही है घर के पास रोजगार’ 
       इस योजना से ग्रामीण महिलाओं को विशेष लाभ मिल रहा है। नर्सरियों में अब तक लगभग 3400 मानव दिवस कार्य सृजित किए जा चुके हैं, जबकि कुल 8000 मानव दिवस रोजगार सृजन का लक्ष्य रखा गया है। उल्लेखनीय बात यह है कि इसमें लगभग 80 प्रतिशत भागीदारी महिलाओं की है। घर के पास रोजगार मिलने से महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं और परिवार की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

’पर्यावरण संरक्षण को भी मिलेगा बढ़ावा’
         पौधों के रोपण से क्षेत्र का हरित आवरण बढ़ेगा और कार्बन अवशोषण क्षमता मजबूत होगी। 1.80 लाख मिश्रित प्रजातियों के पौधारोपण से जैव विविधता को भी बढ़ावा मिलेगा। कवर्धा परियोजना मंडल की यह पहल दर्शाती है कि शासकीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति को भी मजबूत बनाया जा सकता है। यह योजना वनांचल क्षेत्रों में हरियाली, रोजगार और महिला सशक्तिकरण का प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभर रही है।

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