रायपुर। शासन की योजनाएं जब जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचती हैं, तो वे केवल आर्थिक सहायता का माध्यम नहीं रहतीं, बल्कि आत्मविश्वास और आत्मनि...
रायपुर। शासन की योजनाएं जब जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचती हैं, तो वे केवल आर्थिक सहायता का माध्यम नहीं रहतीं, बल्कि आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की नई राह भी खोलती हैं। ऐसी ही एक प्रेरक कहानी कोरबा के ग्राम सोनपुरी की रहने वाली शुकवारो बाई की है, जिनके जीवन में छत्तीसगढ़ शासन की महतारी वंदन योजना आर्थिक संबल का आधार बनी है।
शुकवारो बाई के बैंक खाते में महतारी वंदन योजना के तहत हर माह एक हजार रुपये की राशि नियमित रूप से पहुंच रही है। वे इस राशि को प्रतिमाह निकालने के बजाय सामान्यतः दो से तीन माह में एक साथ निकालती हैं और घर-परिवार की आवश्यकताओं में इसका उपयोग करती हैं। परिवार में उनके पति मजदूरी का कार्य करते हैं। सीमित आमदनी के बीच शासन से मिलने वाली यह नियमित सहायता परिवार के लिए अतिरिक्त आर्थिक सहारा बन गई है।
शुकवारो बाई बताती हैं कि पहले छोटी-छोटी घरेलू जरूरतों के लिए भी परिवार की आय पर निर्भर रहना पड़ता था। अब हर महीने खाते में आने वाली राशि से उन्हें अपने खर्चों को व्यवस्थित करने में सुविधा होती है। घर की जरूरत का सामान खरीदने से लेकर अन्य आवश्यक घरेलू खर्चों में वे इस राशि का उपयोग करती हैं। उनके लिए यह राशि केवल एक हजार रुपये नहीं, बल्कि अपने हाथ में मौजूद आर्थिक सुरक्षा और आत्मविश्वास का माध्यम है।
इस बार रक्षाबंधन का पर्व शुकवारो बाई के लिए कुछ खास होने वाला है। उन्होंने तय किया है कि महतारी वंदन योजना से बचाकर रखी गई राशि का उपयोग इस बार अपने लिए करेंगी। उनका कहना है कि आमतौर पर महिलाएं अपनी जरूरतों से पहले परिवार की जरूरतों को प्राथमिकता देती हैं, लेकिन इस बार वे शासन से मिली इस राशि से अपने लिए आवश्यक सामान खरीदेंगी और रक्षाबंधन का त्योहार अपने लिए भी खुशी के साथ मनाएंगी।
शुकवारो बाई महतारी वंदन योजना के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहती हैं कि सरकार द्वारा महिलाओं के खाते में हर माह राशि पहुंचाने से महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूती मिली है। वे मुख्यमंत्री श्री साय को स्नेहपूर्वक ‘भैया’ कहते हुए भावुक होकर कहती हैं कि उन्होंने अपनी बहनों का ख्याल रखा है। उनके अनुसार, नियमित रूप से खाते में राशि आने से महिलाओं को यह भरोसा मिला है कि वे अपनी छोटी-बड़ी जरूरतों के लिए किसी पर पूरी तरह निर्भर नहीं हैं।
शुकवारो बाई की कहानी यह बताती है कि किसी योजना की सफलता केवल आंकड़ों में नहीं, बल्कि उसके लाभ से जुड़े परिवारों के जीवन में आए बदलाव में दिखाई देती है। महतारी वंदन योजना के माध्यम से मिलने वाली नियमित आर्थिक सहायता ने उनके जैसे परिवारों की महिलाओं को आर्थिक निर्णय लेने, अपनी जरूरतों को पूरा करने और आत्मसम्मान के साथ जीवन जीने का अवसर दिया है।

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