विष्णु प्रसाद वर्मा सहायक संचालक रायपुर/ छत्तीसगढ़ की पावन धरा आज न केवल अपने प्राकृतिक संसाधनों और समृद्ध सां...
- विष्णु प्रसाद वर्मा
सहायक संचालक
रायपुर/ छत्तीसगढ़ की पावन धरा आज न केवल अपने प्राकृतिक संसाधनों और
समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए जानी जा रही है, बल्कि यह राज्य शिक्षा के
क्षेत्र में भी एक नई अभूतपूर्व क्रांति का साक्षी बन रहा है। राज्य में
उच्च शिक्षा अब केवल पारंपरिक ज्ञान अर्जन का माध्यम मात्र नहीं रह गई है,
बल्कि यह प्रदेश के लाखों युवाओं को आत्मनिर्भर, दक्ष और वैश्विक स्तर पर
प्रतिस्पर्धी बनाने का एक सशक्त एवं टिकाऊ आधार बन चुकी है। राज्य सरकार ने
‘सेवा का संकल्प’ और ‘सेवा आपके द्वार’ के मूलमंत्र को धरातल पर उतारते
हुए शिक्षा के मंदिर को हर उस गांव और सुदूर अंचल तक पहुँचाया है, जहाँ कभी
उच्च शिक्षा पाना एक कठिन स्वप्न जैसा था। इस दूरदर्शी और संवेदनशील सोच
का ही सुखद परिणाम है कि आज पूरे प्रदेश का उच्च शिक्षा परिदृश्य एक नई
चेतना और 'सेवा कहानी की' का नया स्वर्णिम अध्याय लिख रहा है।
वर्षों से चले आ रहे क्षेत्रीय असंतुलन को समाप्त करने के लिए
सरकार ने विशेष प्राथमिकता के साथ वनांचल और ग्रामीण क्षेत्रों में नवीन
शासकीय महाविद्यालयों की स्थापना की है। केवल नए कॉलेज खोलना ही ध्येय नहीं
रहा, बल्कि पहले से संचालित संस्थानों में नए संकायों, नवीन विषयों और
अध्ययन सीटों का निरंतर विस्तार किया जा रहा है ताकि किसी भी मेधावी छात्र
को अवसरों की कमी न महसूस हो। इसके साथ ही, उच्च शिक्षण संस्थानों के
बुनियादी ढाँचे को एक नया और आधुनिक स्वरूप प्रदान किया गया है। पुराने
जीर्ण-शीर्ण भवनों का कायाकल्प करने के साथ-साथ आधुनिक वास्तुकला से युक्त
नए परिसरों का निर्माण किया जा रहा है। विद्यार्थियों को प्रयोगात्मक ज्ञान
से जोड़ने के लिए उन्नत प्रयोगशालाएँ, समृद्ध ज्ञानकोश से युक्त पुस्तकालय
और अत्याधुनिक ई-क्लासरूम जैसी डिजिटल सुविधाएँ परिसरों में स्थापित की जा
रही हैं, जिससे ग्रामीण छात्र भी सीधे वैश्विक ज्ञान नेटवर्क से जुड़ पा
रहे हैं।
शैक्षणिक गुणवत्ता को वैश्विक मानकों के समकक्ष लाने के
उद्देश्य से छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का चरणबद्ध और
सुनियोजित क्रियान्वयन किया जा रहा है। जुलाई 2024 से सभी शासकीय एवं निजी
महाविद्यालयों में स्नातक पाठ्यक्रमों में इसे सफलतापूर्वक लागू करने के
बाद, अब वर्ष 2025 से पं. सुंदरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय, बिलासपुर और
इंदिरा कला एवं संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों
में भी एनईपी लागू कर दिया गया है। इसी विकास यात्रा को आगे बढ़ाते हुए
सत्र 2025-26 से चार वर्षीय बी.एड., प्राच्य संस्कृत और बीपीएड जैसे
व्यावसायिक तथा विशिष्ट पाठ्यक्रमों को भी इसके दूरदर्शी दायरे में लाया जा
रहा है, जिससे विद्यार्थियों को बहुविषयक और व्यावहारिक शिक्षा प्राप्त हो
सके।
शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि
चरित्र निर्माण और जीवन कौशल का विकास है। विद्यार्थियों के मानसिक
स्वास्थ्य, परीक्षा के तनाव और भविष्य की चिंताओं को दूर करने के लिए
महाविद्यालयों में 'करियर एवं मार्गदर्शन प्रकोष्ठ' स्थापित किए जा रहे
हैं, जहाँ विशेषज्ञों और मनोवैज्ञानिकों द्वारा निरंतर काउंसलिंग की
व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही, शिक्षक-छात्र के आदर्श अनुपात को बनाए
रखने के लिए नए पदों का सृजन किया जा रहा है और राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा
अभियान के माध्यम से 'नैक' मूल्यांकन को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
अकादमिक कैलेंडर में खेलकूद, एन.एस.एस., एन.सी.सी. व योग जैसी गतिविधियों
के समावेश से युवाओं में अनुशासन और नेतृत्व क्षमता का बीजारोपण हो रहा है।
राज्य शासन की ये बहुआयामी और दूरदर्शी नीतियाँ बुनियादी ढाँचे,
डिजिटल कनेक्टिविटी और रोजगार के अवसरों को एक साथ जोड़कर युवाओं के सपनों
को नई उड़ान दे रही हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रांतिकारी प्रावधानों,
सुदृढ़ इंफ्रास्ट्रक्चर और समर्पित नेतृत्व के बल पर छत्तीसगढ़ का उच्च
शिक्षा क्षेत्र आज अपने स्वर्णिम युग में प्रवेश कर चुका है। 'सेवा संकल्प
अभियान' के तहत उठाए गए ये ऐतिहासिक कदम न केवल वर्तमान पीढ़ी को संवार रहे
हैं, बल्कि आने वाले कल के लिए ऐसे समर्थ, सजग और हुनरमंद नागरिकों का
निर्माण कर रहे हैं जो वैश्विक मंच पर छत्तीसगढ़ और भारत का नाम गर्व से
रोशन करेंगे।

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