किसानों को अब 425 रुपये प्रति क्विंटल की दर से होगा भुगतान नई दर 2025-26 सत्र से ही लागू श्री धनंजय राठौर संयुक्त संचालक जनसंपर्क, र...
किसानों को अब 425 रुपये प्रति क्विंटल की दर से होगा भुगतान
नई दर 2025-26 सत्र से ही लागू
- श्री धनंजय राठौर
संयुक्त संचालक जनसंपर्क, रायपुर
रायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि अन्नदाता की खुशहाली ही छत्तीसगढ़
का आधार है। किसानों को उनकी मेहनत का बेहतर प्रतिफल मिले, खेती लाभकारी
बने और किसान परिवार आर्थिक रूप से सशक्त हों, इसके लिए राज्य सरकार
प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री श्री साय ने किसानों के हितों को ध्यान में
रखकर शक्कर कारखानों के लिए गन्ने की खरीदी 425 रुपए प्रति क्विंटल की दर
से करने का निर्णय लिया है। पेराई सत्र 2025- 26 में की गई खरीदी का भुगतान
भी बढ़े हुए दर पर किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री
नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र और राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने,
कृषि लागत को कम करने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में निरंतर
कार्य कर रही है। छत्तीसगढ़ सरकार भी किसानों के हितों को अपनी नीतियों और
निर्णयों के केंद्र में रखकर आगे बढ़ रही है। किसानों की आवश्यकताओं और
समस्याओं के प्रति सरकार संवेदनशील है। किसान हित से जुड़े विषयों पर
प्राथमिकता से निर्णय लिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश की
अर्थव्यवस्था और ग्रामीण समृद्धि में किसानों की महत्वपूर्ण भूमिका है।
खेती-किसानी मजबूत होगी तो गांव मजबूत होंगे। गांवों की समृद्धि से ही
छत्तीसगढ़ की समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होगा।
छत्तीसगढ़ सरकार ने गन्ना किसानों की आय बढ़ाने और गन्ने की खेती को लाभकारी
बनाने के लिए गन्ने के खरीदी मूल्य में बड़ी बढ़ोतरी की है। छत्तीसगढ़ सरकार
ने गन्ने का खरीदी मूल्य 355 रूपए प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 425 रूपए प्रति
क्विंटल कर दिया है। इस बढ़े हुए मूल्य का लाभ पेराई सत्र 2025-26 के गन्ने
पर भी मिलेगा। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि राज्य की चार
सहकारी चीनी मिलों से जुड़े 31 हजार से अधिक किसानों को लगभग 51.09 करोड़ का
बोनस वितरित किया जाएगा।
राज्य सरकार ने गन्ना खरीदी दर बढ़ाकर 425 रुपये प्रति क्विंटल कर दी
देश के कुल गन्ना उत्पादन में छत्तीसगढ़ का योगदान भले ही कम है लेकिन
गन्ना किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने में राज्य अब नंबर वन हो
गया है। राज्य सरकार ने गन्ना खरीदी दर बढ़ाकर 425 रुपये प्रति क्विंटल कर
दी है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में लिए गए इस फैसले से
छत्तीसगढ़ में गन्ने की खरीदी दर उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब जैसे
प्रमुख उत्पादक राज्यों की तुलना में अधिक हो गई है। खास बात यह है कि बढ़ी
हुई दर पेराई सत्र 2025-26 से ही लागू होगी। इस सत्र में पहले ही गन्ना बेच
चुके किसानों को भी बढ़ी हुई दर के अनुसार भुगतान किया जाएगा।
किसानों को प्रति क्विंटल 70 रुपये अधिक मिलेंगे
सरकार के इस फैसले का उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाने के साथ गन्ने की
खेती को अधिक लाभकारी बनाना है।राज्य में पहले गन्ने की खरीदी 355 रुपये
प्रति क्विंटल की दर से होती थी। नई दर से किसानों को प्रति क्विंटल 70
रुपये अधिक मिलेंगे। गन्ना मूल्य में यह बढ़ोतरी ऐसे समय में की गई है, जब
खेती की लागत और किसानों की आमदनी के बीच संतुलन बनाना कृषि नीति की प्रमुख
चुनौती है।
देश के प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश में अगैती प्रजाति
के गन्ने का राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) 400 रुपये प्रति क्विंटल, हरियाणा
में 415 रुपये और पंजाब में 416 रुपये प्रति क्विंटल है। जबकि महाराष्ट्र
और कर्नाटक में गन्ने का भुगतान केंद्र सरकार के उचित एवं लाभकारी मूल्य
(एफआरपी), चीनी की रिकवरी और संबंधित मिलों की व्यवस्था के आधार पर
निर्धारित होता है। केंद्र सरकार ने 2026-27 के लिए 10.25 प्रतिशत चीनी
रिकवरी पर एफआरपी 365 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है।
किसानों की आय बढ़ाने पर जोर
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा है कि सरकार का उद्देश्य
किसानों को उनकी उपज का उचित और बेहतर मूल्य दिलाना तथा खेती को सम्मानजनक
और लाभकारी आजीविका बनाना है। गन्ना खरीदी दर में वृद्धि इसी दिशा में
उठाया गया कदम है। प्रति क्विंटल 70 रुपये की बढ़ोतरी से किसानों को उनकी
कुल बिक्री के अनुपात में अतिरिक्त आमदनी मिलेगी।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा है कि किसानों को उनकी मेहनत
का बेहतर प्रतिफल मिले, खेती लाभकारी बने और हमारे अन्नदाता निरंतर समृद्ध
हों-इसी संकल्प के साथ हमारी सरकार आगे बढ़ रही है। नई दर का लाभ कीमतों
में बढ़ोतरी से पहले बेचे गए गन्ने पर भी लागू होगी। इससे चालू पेराई सत्र
में अपनी उपज की आपूर्ति कर चुके किसानों को भी राहत मिलेगी। यह व्यवस्था
मूल्य वृद्धि के लाभ को व्यापक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।गन्ने की
खरीदी दर में वृद्धि का असर केवल किसानों की आमदनी तक सीमित नहीं है। बेहतर
मूल्य मिलने से आने वाले समय में किसान गन्ने की खेती के रकबे, उत्पादन
लागत और संभावित लाभ का नए सिरे से आकलन कर सकते हैं।
छत्तीसगढ़ में हर साल लगभग 18.6 लाख से 20.4 लाख टन गन्ने का उत्पादन
गन्ना उत्पादन में छत्तीसगढ़ का देश में 14 वां स्थान है। छत्तीसगढ़ में
वर्तमान में 4 प्रमुख सहकारी शक्कर कारखाने संचालित हैं, भोरमदेव सहकारी
चीनी मिल (कवर्धा), महामाया सहकारी चीनी मिल (सूरजपुर), सरदार वल्लभ भाई
पटेल सहकारी चीनी मिल (पंडरिया, कबीरधाम) और मां दंतेश्वरी मैय्या सहकारी
चीनी मिल (बालोद) है। छत्तीसगढ़ में हर साल लगभग 18.6 लाख से 20.4 लाख टन
गन्ने का उत्पादन होता है। छत्तीसगढ़ के कबीरधाम, सूरजपुर, जगदलपुर, सरगुजा,
दुर्ग, बिलासपुर व रायपुर जिलो में गन्ने की खेती बड़े पैमाने पर की जा रही
है । सर्वाधिक उत्पादन देने वाले जिलो में कबीरधाम, जगदलपुर एवं सरगुजा
जिले आते है।

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