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राज्योत्सव 2026 : पद्मश्री हेमचंद मांझी की नाड़ी चिकित्सा पद्धति बनी स्वास्थगत उपचार का केंद्र

  प्रदर्शनी में पारंपरिक चिकित्सा पद्धति से असाध्य रोगों के उपचार की मिल रही जानकारी रायपुर । छत्तीसगढ़ राज्य की स्थापना के 26वीं वर्षगांठ ...



 प्रदर्शनी में पारंपरिक चिकित्सा पद्धति से असाध्य रोगों के उपचार की मिल रही जानकारी


रायपुर । छत्तीसगढ़ राज्य की स्थापना के 26वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में प्रदेश सरकार द्वारा राज्योत्सव-2026 के तीन दिवसीय मेले का आयोजन किया गया है, जहां चित्ताकर्षक स्टॉल और विभिन्न जोन में प्रदर्शनी लगाई गई है जिनमें छत्तीसगढ़ के क्रमिक विकास और गतिविधियों को दर्शाया गया है।  


छत्तीसगढ़ की पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियां आज भी लोगों के लिए उम्मीद और विश्वास का सशक्त माध्यम बनी हुई हैं। राज्योत्सव 2026 में तकनीकी एवं शिक्षा डोम में लगी प्रदर्शनी में नारायणपुर जिले के विख्यात नाड़ी वैद्य पद्मश्री सम्मानित हेमचंद मांझी की चिकित्सा पद्धति बरबस ही लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है। अपने जीवन के 77वें पड़ाव में पहुंच चुके श्री मांझी बचपन से ही इस चिकित्सा पद्धति से जुड़े हैं। उन्होंने 12 वर्ष की छोटी उम्र में ही आयुर्वेद और जंगली जड़ी बूटियों के महत्व और उनसे उपचार की शुरुआत की थी। पारंपरिक आयुर्वेद चिकित्सा के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए वर्ष 2024 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया।


पद्मश्री से सम्मानित श्री मांझी के पास देश के लगभग सभी राज्यों के साथ विदेशों से भी लोग उपचार के लिए पहुंचते हैं। स्टॉल में मौजूद श्री खेमराज और कुंदन ने बताया कि हाल ही में अमेरिका से भी कुछ लोग कैंसर के उपचार के लिए उनके पास आए थे। उनकी चिकित्सा पद्धति में विभिन्न प्रकार के कैंसर सहित कई बीमारियों के उपचार की जानकारी शामिल है। मरीजों को दवाइयों के साथ खानपान में परहेज करने की सलाह भी दी जाती है, जिससे उपचार का प्रभाव बेहतर होने की बात बताई जाती है।


*नारायणपुर में श्री मांझी प्रतिदिन मरीजों से करते हैं मुलाकात*


वर्तमान में श्री मांझी नारायणपुर के घड़ी चौक स्थित आरईएस कॉलोनी में निवासरत हैं, जहां वे प्रतिदिन सुबह 8:30 बजे से शाम 4:30 बजे तक मरीजों से मिलते हैं। इसके बाद शाम 5 बजे तक भी उपलब्ध रहते हैं। उनसे मिलने नारायणपुर पहुंचने वाले लोगों को विभिन्न बीमारियों की जानकारी और उपचार के लिए जंगली जड़ी बूटियों से बनी दवाइयां मिलती हैं। उनकी चिकित्सा पद्धति में उपयोग होने वाली दवाइयां लगभग 43 किलोमीटर दूर छोटेडोंगर में उपलब्ध होती हैं।


*पारंपरिक चिकित्सा पर आज भी भरोसा कायम*

श्री मांझी की चिकित्सा पद्धति से जुड़ी जानकारी राज्योत्सव की प्रदर्शनी में साझा की गई है। उनके अनुभव और पारंपरिक उपचार पद्धति के बारे में जानने के लिए लोग प्रदर्शनी में पहुंच रहे हैं। कैंसर जैसी गंभीर और जटिल बीमारी के उपचार के लिए भी उनके पास देश-विदेश से मरीजों के आने की जानकारी प्रदर्शनी में दी जा रही है।

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