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नवाचार बच्चों के विकास को बढ़ावा देने के लिये अहम है:लेखी

नयी दिल्ली  ।   केन्द्रीय संस्कृति राज्य मंत्री मीनाक्षी लेखी ने कहा है कि नवाचार हमेशा किशोर-किशोरियों के विकास को बढ़ावा देने के लिये भी म...

नयी दिल्ली  । केन्द्रीय संस्कृति राज्य मंत्री मीनाक्षी लेखी ने कहा है कि नवाचार हमेशा किशोर-किशोरियों के विकास को बढ़ावा देने के लिये भी महत्वपूर्ण रहे हैं और केन्द्र सरकार की दूरदर्शिता भरी पहल युवाओं के बीच नवाचार की संस्कृति को बढ़ावा देने में मदद कर रही है, इसका एक उदाहरण अटल इनोवेशन मिशन और स्टार्टअप हैं। राजधानी में विश्व बाल दिवस के अवसर पर सोमवार की शाम इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) ने यूनिसेफ के साथ मिलकर ‘समानता के लिए नवाचार’ प्रदर्शनी का आयोजन किया। इस अनूठी प्रदर्शनी में पूरे भारत से 14 युवा नवप्रवर्तक अपने अद्भुत काम का प्रदर्शन करने के लिये एक साथ आये। सुश्री लेखी ने प्रदर्शनी का उद्घाटन किया।  इस अवसर पर उन्होंने बताया कि प्रतिभाशाली युवा अन्वेषकों की ओर से प्रस्तुत किये गये विभिन्न प्रकार के नवाचारों में से किसानों, श्रमिकों, विकलांग व्यक्तियों, बुजुर्गों के सामने आने वाली बाधाओं को दूर करने, उनके श्रम को कम करने और उनकी उत्पादकता तथा जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने वाले नवाचार शामिल हैं। इनमें कुछ संचार के लिये स्मार्ट ग्लव्स, पैरा-एथलीटों के लिये होप आर्म, दृष्टिबाधित लोगों के लिये जूते, स्वचालित बीज वितरण के लिये ‘स्टेप एंड सो शू’ और एक रियल टाइम संकेत भाषा अनुवादक जैसे उल्लेखनीय नवाचार शामिल हैं। इस अवसर पर आईजीएनसीए के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने कहा, “कला  और रचनात्मक अभिव्यक्ति मानव संस्कृति का एक अभिन्न अंग है। मानव होने का अर्थ है सोचना, अन्वेषण करना और नवप्रवर्तन करना। नवाचार रचनात्मकता के बारे में है और संस्कृति रचनात्मकता को बढ़ावा देती है।” यूनिसेफ की भारत प्रतिनिधि सुश्री सिंथिया मैककैफ्रे ने कहा, “ जब किशोर-किशोरियों को सोचने, सीखने, प्रयोग करने और नवाचार करने के समान अवसर दिये जाते हैं, तो वे उन समस्याओं के लिये लैंगिक-संवेदनशीलता से युक्त समाधान विकसित करते हैं, जो उन्हें सबसे अधिक प्रभावित करते हैं। नवीन सोच बच्चों को उनके आसपास की चुनौतियों और अवसरों दोनों के बारे में जागरूकता प्रदान करती है। ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स में भारत का 81वें से 40वें स्थान पर पहुंचना, भारत के नवप्रवर्तन की क्षमता और भारत के युवाओं की प्रतिभा का एक ठोस संकेतक है।” इस अवसर पर तीन राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित और देश के अग्रणी ध्रुपद गायक मलिक बंधुओं, पंडित प्रशांत मलिक और पंडित निशांत मलिक ने अपनी गायकी से श्रोताओं को आनंदविभोर कर दिया। उन्होंने अपने गायन की शुरुआत ‘रागश्री’ से की। इसी अवसर पर प्रख्यात कथक नर्तक विश्वदीप ने अपनी कथक प्रस्तुति से दर्शकों का मन मोह लिया।



 


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