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हैंडपंप के भरोसे पेयजल निर्भर वाले गांवों की समस्या दिनों दिन बढ़ती जा रही है

कोरबा। जल जीवन मिशन की शुरूआत वर्ष 2019 से हुई है। 1,305 करोड़ की लागत से दिसंबर 2024 तक 703 गांव के घर-घर पानी पहुंचाना है। चार साल बीत जाने...

कोरबा। जल जीवन मिशन की शुरूआत वर्ष 2019 से हुई है। 1,305 करोड़ की लागत से दिसंबर 2024 तक 703 गांव के घर-घर पानी पहुंचाना है। चार साल बीत जाने के बाद के बाद केवल 27 गांवों में ही पानी पहुंच सका है। 676 गांव अभी भी पुराने हैंडपंप, कुंआ, ढोंढ़ी या फिर नलजल योजना पर निर्भर हैं। 300 ऐसे गांव हैं जहां ग्रीष्म की शुरूआत से ही जल संकट शुरू हो जाती है। लक्ष्य पूरा करने में दस माह का समय शेष है। योजना को मूर्तरूप देने में क्रेडा और पीएचई में आपसी तालमेल नहीं है। जिस रफ्तार से काम हो रहा है, उससे घरों तक तक पानी पहुंच पाना मुश्किल नजर आ रहा है। केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त सहयोग से जल जीवन मिशन से घर-घर पानी पहुंचाने के लिए योजना बनाई गई है। जिले में 412 ग्राम पंचायत 703 गांवों में विभक्त हैं। इनमें 245 गांवों को समूह जल आवर्धन योजना से पानी दिया जाना हैं। इनमें बांगो बांध से एतमानगर, हसदेव नदी से कुदुरमाल एनीकट, डूबान क्षेत्र से सतरेंगा जैसे वृहत योजना शामिल है। इसके लिए 799 करोड़ खर्च किया जाना है। योजना का प्राक्कलन तैयार होने के तीन साल बीतने के बाद एक भी समूह नल जल योजना धरातल में आना तो दूर शुरूआत भी नहीं हुई है। समूह जल योजना केवल कागजों में ही सिमट कर रह गया है। शेष 458 गांवों को अलग-अलग स्त्रोतों से जल जीवन मिशन के तहत पानी देने की योजना है। योजना को मूर्त रूप देने का काम पीएचई और क्रेडा के माध्यम से कराया जा रहा है।   पीएचई का कार्य जल स्त्रोत से शुद्ध पेय जल उपलब्ध कराना है। क्रेडा का काम पाइप लाइन बिछाना व सौर ऊर्जा से मोटर चालू कर घरों तक जल प्रदाय करना है। 113 ऐसे गांव हैं जहां जल स्त्रोत ढूंढने के साथ बोर भी लगाया जा चुका है लेकिन पाइप लाइन नहीं बिछने के कारण घरों तक पानी पहुंचाना संभव नहीं हो सका है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि दो साल तक निर्माण कार्य में कोरोना काल की बाधा रही रही। इसके साथ ही समय पर राशि नहीं मिलने के कारण कार्य शुरू करने में देरी हो रही है। योजना शुरू होने से जिले के 23 हजार 288 परिवारों को घर में ही पानी मिलेगा। ग्रीष्म की शुरूआत लगभग हो चुकी है।

तापमान में वृद्धि के भूमिगत जल स्त्रोत में भी कमी आएगी। प्रशासन स्तर पर सफल मानिटिंरिंग नहीं नहीं होने की वजह से कार्य में प्रगति नही है। फ्लोराइड प्रभावित गांवों की दशा यथावत समूह जल योजना शुरू करने का उद्देश्य फ्लोराइड प्रभावित गांव के ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल पहुंचाना है। पोड़ी उपरोड़ा पर्वतीय क्षेत्र होने के साथ सर्वाधिक फ्लोराइड प्रभावित वाला ब्लाक है। बांगों बांध प्रभावित गांव में पानी नहीं पहुंचने के कारण स्थानीय ग्रामीण भूमिगत स्त्रोत के जल पीने को मजबूर हैं। फूलसर, सरमा, जलके, तनेरा आदि ऐसे गांव हैं जहां फ्लोराइड युक्त पानी से लोगों को अस्थि बाधित रोग से जूझना पड़ रहा है।

समस्या से निजात पाने के लिए लगाए गए रिमुअल प्लांट खराब हो चुके हैं। जिनका संधारण नहीं हुआ है। कालरी प्रभावित गांवो में जल संकट का नहीं निदान राज्य के सर्वाधिक कोयला खदानें कोरबा जिले में है। खदानों का लगातार विस्तार हो रहा है। भूमिगत जल स्त्रोत खदान में इकठ्ठा हो जाते हैं। खदान के आसपास के गांव में जल संकट बढ़ते ही रहा है। हरदीबाजार, ढपढप, अरदा, कोरबी, चोटिया आदि ऐसे गांव हैं जहां गर्मी शुरू होने से पहले पेयजल की समस्या बढ़ जाती है। खदान प्रभावित क्षेत्र होने के कारण खेतों में भी वर्षा जल नहीं रूक पाता। वर्षा आश्रित खेती करने वाले किसानों को क्षेत्र में अक्सर सूखे का सामना करना पड़ता है।

खदान के पानी को प्रभावित गांव तक पहुंचाने की योजना बनी थी लेकिन एसईसीएल की ओर से राशि नहीं जारी किए जाने के कारण योजना कागजों में ही सिमट गई है। 12 ग्राम पंचायतों में नल जल योजना टंकी खाली जल जीवन मिशन शुरू होने ने से पहले ग्राम पंचायतों में नल-जल योजना की शुरूआत की गई थी। जिले के 90 ग्राम पंचायतों में बोर की खुदाई कर जलापूर्ति के लिए टंकी तैयार की गई है। जल स्त्रोत सूखने और बोर खराब होन के कारण रजगामार, बरपाली, कोरकोमा सहित 12 ग्राम पंचायतों की टंकियां खंडहर में तब्दील हो रही हैं। ग्राम पंचायतों में पीएचई विभाग की ओर से प्रति वर्ष 15 हजार रूपये संधारण राशि दी जाती हैं।

बंद हो चुके नल-जल को चार साल से भी अधिक समय बीत जाने के बाद सुधार नहीं हुआ है। पहुंच चुकी संधारण सामगी, मार्च से होगा संधारण शुरू जिले में पीएचई के 14 हजार 454 हैंडपंप है। ग्रीष्म का दौर शुरू हो चुका है विभाग की ओर अभी तक मोबाइल उड़नदस्ता टीम का गठन की तैयारी चल रहा रही है। हैंडपंप के भरोसे पेयजल निर्भर वाले गांवों की समस्या दिनों दिन बढ़ती जा रही है। निस्तारी के तालाब व नालों में पानी कम होने की वजह से लोग अब हैंडपंप पर ही आश्रित होने लगे हैं। अधिक भार पड़ने के कारण भी हैंडपंप बंद होेने के कगार पर आने लगे हैं। जिले में 703 गांव में घर-घर जल पहुंचाने की योजना है। 458 गांव में जल जीवन मिशन व शेष 245 गांव में समूह जल योजना से पानी पहुंचाया जाना है। समूह जल का काम प्रगतिरत है। जल जीवन मिशन के तहत 27 गांव में जलापूर्ति का काम पूरा किया जा चुका है। दिसंबर माह तक सभी गांव में पेयजल आपूर्ति कर दी जाएगी। अनिल बच्चन, मुख्य कार्यपालन अभियंता, पीएचई

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