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दिव्यांगता को नहीं बनने दिया बाधा, रामकली हल्बा बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल

    ’समाज कल्याण विभाग की ऋण योजना से बदली जिंदगी, आज दूसरों को भी दे रहीं रोजगार’ ’सुशासन तिहार 2026 में समयपूर्व ऋण चुकाने और सफल व्यवसाय ...

 

 


’समाज कल्याण विभाग की ऋण योजना से बदली जिंदगी, आज दूसरों को भी दे रहीं रोजगार’
’सुशासन तिहार 2026 में समयपूर्व ऋण चुकाने और सफल व्यवसाय संचालन के लिए हुईं सम्मानित’

रायपुर। छत्तीसगढ़ में शासन की जनकल्याणकारी योजनाएं जरूरतमंद लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं। विशेष रूप से समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित स्वरोजगार एवं ऋण योजनाएं दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के विकासखंड अंबागढ़ चौकी अंतर्गत ग्राम बिहरीकला की निवासी श्रीमती रामकली हल्बा की, जिन्होंने अपनी मेहनत, लगन और आत्मविश्वास से सफलता की नई मिसाल कायम की है।
अस्थिबाधित दिव्यांग श्रीमती रामकली हल्बा को वर्ष 2011 में समाज कल्याण विभाग से 50 हजार रूपये का ऋण प्राप्त हुआ। इस सहायता राशि से उन्होंने अपने गांव में किराना दुकान का व्यवसाय प्रारंभ किया। शुरुआत में सीमित संसाधनों के साथ शुरू हुआ यह छोटा व्यवसाय धीरे-धीरे मेहनत और ईमानदारी के बल पर आगे बढ़ता गया।
श्रीमती रामकली बताती हैं कि आर्थिक कठिनाइयों और शारीरिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी। नियमित मेहनत और ग्राहकों के विश्वास के कारण उनका व्यवसाय लगातार बढ़ता गया। आज उनकी किराना दुकान गांव में अच्छी तरह स्थापित हो चुकी है और वे अन्य लोगों को भी रोजगार उपलब्ध करा रही हैं।
उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि उन्होंने लगभग डेढ़ से दो वर्षों के भीतर ही पूरा ऋण चुका दिया। समयावधि से पहले ऋण अदायगी करने पर उन्हें 3,750 रूपये की उत्थान सब्सिडी भी प्राप्त हुई।
श्रीमती रामकली हल्बा की सफलता आज क्षेत्र के लोगों, विशेषकर दिव्यांगजनों और महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी है। उन्होंने यह साबित कर दिया कि यदि अवसर और संकल्प दोनों साथ हों तो कोई भी कठिनाई सफलता की राह में बाधा नहीं बन सकती।

सुशासन तिहार 2026 के अवसर पर जनप्रतिनिधियों द्वारा श्रीमती रामकली हल्बा को समयपूर्व ऋण चुकाने, सफल व्यवसाय संचालन एवं आत्मनिर्भर बनने पर सम्मानित भी किया गया। यह सम्मान उनके संघर्ष, मेहनत और उपलब्धियों की पहचान बना।
श्रीमती रामकली कहती हैं कि शासन की सहायता और अपनी मेहनत के बल पर आज वे आत्मनिर्भर जीवन जी रही हैं। उन्होंने अन्य जरूरतमंद लोगों से भी शासन की योजनाओं का लाभ लेकर स्वरोजगार अपनाने और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने की अपील की है।

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