बिलासपुर: अग्रिम जमानत या नियमित जमानत के लिए अदालतों में याचिका दायर करने के साथ अब केस के अलावा अपनी खुद की विस्तार से जानकारी देनी ...
बिलासपुर:
अग्रिम जमानत या नियमित जमानत के लिए अदालतों में याचिका दायर करने के साथ
अब केस के अलावा अपनी खुद की विस्तार से जानकारी देनी होगी। छत्तीसगढ़ हाई
कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल ने अधिसूचना जारी कर दी है। राजपत्र में भी
प्रकाशन हो गया है। जारी अधिसचूना में नए नियमों को तत्काल प्रभाव से लागू
कर दिया है।
हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल रजनीश श्रीवास्तव ने
अधिसूचना जारी कर अग्रिम जमानत और नियमित जमानत के लिए याचिका के साथ दी
जाने वाली जानकारियों के संबंध जरूरी दिशा निर्देश दिया है। नए नियमों व
निर्देश को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। जमानत आवेदन के साथ छह
भागों में जानकारी देनी होगी।
नियमित और अग्रिम जमानत आवेदनों में
एफआइआर नंबर, तिथि, पुलिस स्टेशन और जिले के नाम के अलावा उन धाराओं का भी
जिक्र करना होगा, जिनके तहत केस दर्ज है। यह भी बताना होगा कि पुलिस जिन
धाराओं के तहत एफआइआर दर्ज किया है, उसमें अधिकतम कितनी सजा का प्रविधान
है।
नियमित जमानत आवेदनों में बताना होगा, आरोपित कब गिरफ्तार हुआ
और अब तक कुल कितने समय से जेल में है। यह भी जानकारी देनी होगी कि क्या
आवेदक के खिलाफ कभी गैर जमानती वारंट जारी हुआ है या उसे कभी घोषित अपराधी
करार दिया गया है।
अधिसूचना छत्तीसगढ़ राजपत्र में भी प्रकाशित कर
दी गई है। हाई कोर्ट प्रशासन ने राजपत्र की कापी, राज्य के सभी जिला एवं
सत्र न्यायाधीशों, फैमिली कोर्ट के जजों, एडवोकेट जनरल और बार एसोसिएशन के
अध्यक्षों को भेजी है।
केस का स्टेटस के अलावा गवाहों की संख्या भी बताना होगी
जमानत
आवेदन में यह भी बताना होगा, जिस मामले में जमानत के लिए याचिका दायर की
गई है, संबंधित केस अभी किस स्टेज पर है, इसमें जांच, चार्जशीट पेश हुआ या
नहीं, ट्रायल की स्थिति बतानी होगी।
यह भी बताना होगा कि केस में
कुल कितने गवाह हैं और कितनों के बयान हो चुके हैं। आवेदन करने वाले को
अपना आपराधिक इतिहास भी बताना होगा।
यदि आवेदक पर पहले से कोई अन्य
मामले दर्ज हैं, तो एफआइआर, धाराएं और वर्तमान स्थिति का चार्ट देना होगा।
बताना होगा कि मामला लंबित, बरी या सजा का विवरण देना होगा। संबंधित मामले
में पहले लगाए गए जमानत आवेदन, उनके परिणाम के बारे में भी बताना होगा।

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